उषा अर्घ्य व पारण के पावन छठ गीत 2026 (Usha Arghya Geet)
कार्तिक शुक्ल सप्तमी की ब्रह्मवेला में छठ महापर्व का अंतिम और सबसे उल्लासपूर्ण चरण यानी उषा अर्घ्य (Usha Arghya) संपन्न होता है। वर्ष 2026 में उषा अर्घ्य 16 नवंबर 2026 (सोमवार) की भोर में दिया जाएगा। रात के तीसरे पहर से ही श्रद्धालु पुनः घाटों पर एकत्रित होते हैं और पूर्व दिशा में उगते हुए भगवान सूर्य की लालिमा की प्रतीक्षा करते हैं। अर्घ्य अर्पण के साथ ही 36 घंटे के निर्जला उपवास का पारण होता है।
भोर के समय सूर्य देव की प्रतीक्षा और पारण का आनंद
उषा अर्घ्य के समय गंगा और अन्य नदियों का शीतल जल, ठंडी हवा और घाटों पर जलते हजारों दीप अलौकिक अनुभूति कराते हैं। जब पूर्व दिशा में सूर्य की पहली लालिमा दिखाई देती है, तो समूचा घाट 'उग हे सुरुज देव अरघ के बेरा' की गूंज से जीवंत हो उठता है। गाय के कच्चे दूध और गंगाजल से उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाता है। इसके पश्चात व्रती अदरक, कच्चे चने और गुड़ खाकर व्रत का पारण करते हैं और सभी श्रद्धालुओं को ठेकुआ का महाप्रसाद बांटा जाता है।
उषा अर्घ्य के प्रमुख अमर छठ भजन
सुबह के अर्घ्य के समय गाए जाने वाले गीतों में सूर्य देव के आगमन का स्वागत और पर्व की सफलता का उल्लास होता है:
-
उगा हे सूरज देव रीप्राइज (Uga He Suraj Dev Reprise) स्वर: स्वाति मिश्रा – सुबह की किरण के साथ नवऊर्जा का गान
-
तोरी बगिया में (Tori Bagiya Me) स्वर: स्वाति मिश्रा – छठी मईया की बगिया का मधुर गीत
-
निमिया के डाढ़ मईया (Nimiya Ke Dadh Maiya) स्वर: स्वाति मिश्रा – देवी विदाई व आशीर्वाद का पावन भजन
पारण के नियम और ठेकुआ प्रसाद वितरण
पारण के बाद व्रती अपने बड़ों का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति छठ व्रती के चरणों की धूल लेता है, उसे भी इस महापर्व का पुण्य फल प्राप्त होता है। ठेकुआ प्रसाद को वर्ष भर सहेज कर रखा जाता है और दूर-दराज रहने वाले मित्रों व संबंधियों तक प्रेम से पहुंचाया जाता है।
