खरना के छठ गीत 2026 (Kharna Chhath Geet & Bhajans)
छठ महापर्व के दूसरे दिन को खरना (Kharna) अथवा लोहंडा कहा जाता है। वर्ष 2026 में खरना 14 नवंबर 2026 (शनिवार) को पड़ रहा है। इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं और शाम को मिट्टी के नए चूल्हे पर गुड़ और अरवा चावल की खीर (रसियाव) तथा घी लगी गेहूं की रोटी बनाकर छठी मईया को भोग लगाते हैं। इसके उपरांत 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत आरंभ होता है।
खरना की नीरव शांति और 'रसियाव' का आध्यात्मिक रहस्य
खरना की पूजा शाम के समय बिल्कुल शांत वातावरण में की जाती है। मान्यता है कि जब व्रती भगवान सूर्य और छठी मईया को भोग अर्पित करके स्वयं प्रसाद ग्रहण करते हैं, उस समय घर में किसी भी प्रकार की आवाज (जैसे बर्तन की खटपट या बातचीत) नहीं होनी चाहिए। व्रती जब तक प्रसाद खाते हैं, घर में संपूर्ण मौन रखा जाता है। इसके पश्चात परिवार, पड़ोसी और सगे-संबंधी प्रसाद ग्रहण करने आते हैं।
खरना की शांत संध्या में गूंजने वाले प्रमुख भजन
खरना की शाम अत्यधिक भक्तिमय और शांत होती है। इस समय धीमे स्वर में गाए जाने वाले पारंपरिक छठ गीत मन को एकाग्र करते हैं:
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उग हे सूरज देव (Ugg Ho Suraj Dev) स्वर: अनुराधा पौडवाल – सूर्य उपासना का दिव्य भजन
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छठी मईया बुलाये (CHHATHI MAIYA BULAYE) स्वर: विशाल मिश्रा – आत्मिक पुकार व समर्पण
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जोड़े जोड़े फलवा सुरुज देव (Jode Jode Falwa) स्वर: स्वाति मिश्रा – सूप सजाने और फल अर्पण का मधुर गीत
ठेकुआ प्रसाद की तैयारी
खरना की रात से ही घर की माताएं और बहनें अगले दिन के संध्या अर्घ्य के लिए मुख्य महाप्रसाद ठेकुआ और कसार बनाने की तैयारी शुरू कर देती हैं। शुद्ध गेहूं के आटे, गुड़, घी, सौंफ और इलायची से बनने वाला ठेकुआ केवल छठ के पावन चूल्हे पर ही बनाया जाता है।
